Citizenship Act: केंद्रीय कानून को मानने के लिए देश का संविधान हर राज्य को करता है बाध्य

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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) पर राजनीति गर्म हैं। सीएए का विपक्षी दल सड़कों पर विरोध कर रहे हैं और राजनैतिक नफा नुकसान आंकती राज्य की कुछ सरकारें बयान दे रही हैं कि वे अपने यहां सीएए लागू नहीं कराएंगी या वे एनआरसी नहीं लागू करेंगी।

संसद से पास कानून को राज्य सरकारें मानने से इन्कार नहीं कर सकतीं

संसद से पास कानून और केंद्र सरकार के निर्देशों को नकारने की यह घोषणा भले ही राज्य सरकारों के लिए राजनैतिक लाभ की हों, लेकिन संविधान इस बारे में साफ है कि राज्य सरकारें केंद्र के बनाए कानून या केंद्र के निर्देशों को मानने से इन्कार नहीं कर सकतीं।

केंद्र के निर्देशों को मानना राज्य का दायित्व है

संविधानविदों का कहना है कि केंद्र के निर्देशों को मानना राज्य का दायित्व है और उन्हें न मानना संवैधानिक तंत्र का फेल होना माना जाता है और उसके परिणाम संविधान में दिये गये हैं।

पूरे देश में एनआरसी लागू होने के भाजपा के बयान पर सीएए के साथ जुड़ गया एनआरसी

सीएए आ चुका है और एनआरसी की चर्चा है। अभी एनआरसी की कोई घोषणा नहीं हुई है न ही किसी को नियम कानून पता हैं। एनआरसी फिलहाल सिर्फ असम मे लागू हुई है और वह भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से। लेकिन भाजपा की ओर से कहा जाता रहा है कि देश भर में एनआरसी लागू की जाएगी और इसीलिए सीएए का विरोध करने वाले उसे एनआरसी से जोड़ रहे हैं। एक वर्ग के विरोध को देखते हुए कुछ राज्य सरकारों ने सीएए और एनआरसी को न लागू करने के बयान दिये हैं।

सातवीं अनुसूची की केंद्रीय सूची में शामिल विषयों पर संसद कानून बना सकती है

संविधान की सातवीं अनुसूची की केंद्रीय सूची में वे विषय दिये गए हैं जिन पर सिर्फ केंद्र सरकार यानी संसद कानून बना सकती है। केंद्रीय सूची की प्रविष्टि 17 में नागरिकता, न्यट्रलाइजेशन और एलियन्स यानी बाहरी लोगों के बारे में कानून बनाने का अधिकार संसद को दिया गया है। प्रविष्टि 18 प्रत्यार्पण के बारे में और प्रविष्टि 19 भारत में प्रवेश और इमीग्रेशन तथा भारत से बाहर निकालना, पासपोर्ट और वीजा के बारे में संसद को कानून बनाने का एकछत्र अधिकार देती है। यानी इससे साफ है कि नागरिकता के बारे में कानून बनाने और घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र को है।

सीएए को लागू करना राज्यों की बाध्यता है- पूर्व सालिसिटर जनरल

पूर्व सालिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार कहते हैं कि इन विषयों पर केंद्र सरकार को कानून बनाने का अधिकार है और राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह उन कानूनों का पालन करें। सीएए नागरिकता से संबंधित कानून है और इसे लागू करना राज्यों की बाध्यता है। अगर राज्य इसे लागू नहीं करते तो उनका ऐसा करना राज्य में संवैधानिक तंत्र का फेल होना माना जाएगा और संवैधानिक तंत्र फेल होने पर क्या कार्यवाही हो सकती है वह संविधान में स्पष्ट दी गई है।

एनआरसी भी अगर लागू होता है तो उसे भी राज्यों को लागू करना होगा

कुमार कहते हैं कि अनुच्छेद 73 के तहत केंद्र सरकार को उन विषयों पर कोई भी कार्यकारी आदेश जारी करने का अधिकार है जिन पर संसद को कानून बनाने का अधिकार है। एनआरसी अगर लागू भी होता है तो वह नागरिकता से जुड़ा विषय होगा और उस बारे में केंद्र सरकार को कार्यकारी यानी एक्जीक्यूटिव आदेश जारी करने का अधिकार है और राज्यों के लिए उसका पालन करना जरूरी है। हालांकि एक्जीक्यूटिव आदेश की व्याख्या हो सकती है। उसके आयाम हो सकते हैं।

संविधान केंद्र को राज्यों के ऊपर असीमित शक्तियां देती है

हमारा संविधान राज्यों की अलग सरकार की व्यवस्था के साथ ही केंद्र में निहित एकीकृत व्यवस्था का ढांचा भी पेश करता है। जिसके तहत बहुत से ऐसे मौके हैं जिनमें केंद्र सरकार को राज्यों पर प्राथमिकता दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ज्ञानंत सिंह कहते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 256, 365 और 355 की ये तिकड़ी केंद्र को राज्यों के ऊपर असीमित शक्तियां देती है।

अनुच्छेद 256- संसद द्वारा पारित कानून को राज्य सरकारें लागू करेंगी

अनुच्छेद 256 कहता है कि राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह संसद द्वारा पारित कानून लागू करेंगी। इसके अलावा केंद्र राज्यों को जरूरी निर्देश दे सकता है।

अनुच्छेद 365- केंद्र के आदेश का पालन नहीं करने पर राज्य पर राष्ट्रपति का चलेगा संवैधानिक डंडा

अनुच्छेद 365 कहता है कि जब कोई राज्य केंद्र सरकार के एक्जीक्यूटिव आदेश का पालन करने में विफल रहता है तो राष्ट्रपति का यह मानना कानून सम्मत होगा कि राज्य में सरकार संविधान के मुताबिक नहीं चल रही है। अनुच्छेद 355 कहता है कि राज्य को बाहरी और अंदरूनी खतरे से सुरक्षित रखना केन्द्र की जिम्मेदारी है। साथ ही केंद्र की जिम्मेदारी है कि वह देखेगी कि राज्य की सरकार संविधान के मुताबिक चले।

अनुच्छेद 356- राज्य में संवैधानिक तंत्र फेल होने पर राष्ट्रपति शासन लागू की व्यवस्था

अनुच्छेद 356 राज्य में संवैधानिक तंत्र फेल होने पर राष्ट्रपति शासन व अन्य कार्यवाही की बात करता है। इन सबको मिला कर देखा जाए तो नागरिकता के मुद्दे पर राज्यों के पास ना नुकुर का विकल्प नहीं है।