चुनाव तक नगर निगमों में गैर सरकारी सदस्यों की बन सकती हैं समितियां

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भोपाल। Madhya Pradesh Urban Body Election 2020 कांग्रेस की कमलनाथ सरकार सहकारिता और नगरीय निकायों पर अपना वर्चस्व जमाने के लिए गैर सरकारी प्रशासक व सदस्यों की नियुक्ति करने की रणनीति पर काम कर रही है। सहकारिता में तो राज्य सहकारी बैंक और जिला सहकारी बैंकों में सरकार ने अशासकीय सदस्यों को प्रशासक बनाकर बैठाना शुरू कर दिया है। अब इसी तर्ज पर नगरीय निकायों के कार्यकाल समाप्त होने पर प्रशासकों की नियुक्ति की जा रही है।

इन प्रशासकों के अधीन गैर सरकारी सदस्यों की सलाहकार समितियां बैठाए जाने पर तेजी से विचार चल रहा है। इसके लिए विधि विभाग से भी राय ले ली गई है। हालांकि इससे पार्टी में स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की जा रही हैं, जिसके चलते फैसले में देरी हो रही है।

प्रदेश में 16 नगर निगम हैं और सभी जगह भाजपा के महापौर हैं। कांग्रेस के पास 15 नगर निगमों में नेता प्रतिपक्ष और सिंगरौली में बहुजन समाज पार्टी का नेता प्रतिपक्ष है। हालांकि 16 नगर निगमों में से ग्वालियर, सागर, रीवा, सतना, देवास, बुरहानपुर व सिंगरौली का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जबकि भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर, छिंदवाड़ा नगर निगम का कार्यकाल फरवरी में समाप्त होने वाला है।

मुरैना नगर निगम का कार्यकाल अगस्त 2020 में समाप्त होगा। जिन नगर निगम का कार्यकाल समाप्त हो गया है, वहां संभागायुक्त या कलेक्टर या नगर निगम कमिश्नर को प्रशासक बना दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में सरकार बनने के बाद कांग्रेस अब शहर सरकार (नगर निगम) पर भी अपना वर्चस्व बनाने के लिए निगमों का कार्यकाल समाप्त होने के कुछ महीने बाद ही चुनाव कराने पर विचार कर रही है। साथ ही नगर निगमों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशासक बनाकर वहां शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सलाहकार समितियां बनाने की तैयारी कर रही है। इन समितियों में सरकार द्वारा अशासकीय सदस्यों को नियुक्त किया जाएगा, जो निगम के वार्डों में विकास कार्य करवाएंगे।

समितियों से असंतोष बढ़ने की आशंका

सूत्र बताते हैं कि पार्टी के कुछ नेता ऐसी समितियों में नियुक्तियों से असंतोष बढ़ने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। इनके चलते सरकार इस पर और गहन विचार-मंथन में जुट गई है। पार्टी के उच्च पदाधिकारियों के साथ नगरीय विकास और आवास मंत्री जयवर्धन सिंह की बैठकें भी हो चुकी हैं।

मंत्रिमंडल में भी पिछले दिनों अनौपचारिक बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। गौरतलब है कि कमलनाथ सरकार बनने के बाद नगर निगमों में एल्डरमैन बनाने का भी एक प्रस्ताव आया था, लेकिन पार्टी में स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ने की आशंका के चलते उस पर भी सरकार फैसला नहीं ले सकी थी।

नगर निगमों का कार्यकाल

शहर — कार्यकाल

भोपाल — 15 फरवरी 2020

इंदौर — 19 फरवरी 2020

जबलपुर — 19 फरवरी 2020

छिंदवाड़ा — 18 फरवरी 2020

मुरैना — 12 अगस्त 2020

ग्वालियर — 09 जनवरी 2020

सागर — 01 जनवरी 2020

रीवा — 01 जनवरी 2020

सतना — 01 जनवरी 2020

देवास — 01 जनवरी 2020

बुरहानपुर — 08 जनवरी 2020

सिंगरौली — 01 जनवरी 2020

इनका कहना है

नगर निगमों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद कुछ महीने तक प्रशासकों को बैठाए जाने तथा उनकी देखरेख में अशासकीय सदस्यों की सलाहकार समितियों के माध्यम से निगम क्षेत्र में विकास कार्य किए जाने का सुझाव दिया गया है। प्रदेश की नगर निगमों के नेता प्रतिपक्ष की मुख्यमंत्री व नगरीय विकास व आवास मंत्री के साथ एक बैठक भी होना है।

– मोहम्मद सगीर, अध्यक्ष, नगरीय निकाय विभाग, पीसीसी