राज्‍यसभा में बुधवार को पेश होगा बिल, भाजपा बना रही रणनीति!

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नई दिल्‍ली : नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पास हो गया है, अब राज्‍यसभा की बारी है। सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी मिल रही है कि राज्‍यसभा में यह बिल बुधवार को पेश हो सकता है। केंद्र सरकार ने इसे राज्यसभा में भी पास कराने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को संसद में 311 वोटों के साथ बिल को मजूरी मिलने के बाद अब भाजपा ने 10 और 11 दिसंबर को अपनी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आज इस विधेयक को राज्‍यसभा में भी पारित कराने की पूरी कोशिश होगी।

– केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) में भारत की स्थिति को लेकर आज राज्यसभा में बयान देंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों असियान देशों के RCEP में शामिल होने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उसे इन देशों से अपना व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा था।

– गृह मंत्री अमित शाह राज्‍यसभा में आज आर्म्स अमेंडमेंट बिल पेश करेंगे। वैसे, कहा यह भी जा रहा है कि राज्‍यसभा में आज नागरिक संशोधन विधेयक भी पेश हो सकता है। ये बिल सोमवार को लोकसभा में पारित हो गया है।

– असम के डिब्रुगढ़ में नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में छात्र संगठन AASU विरोध प्रदर्शन कर रहा है। यहां छात्र संगठन ने 12 घंटों का बंद बुलाया है। इसकी वजह से यहां दुकाने नहीं खुली हैं और सड़कों पर टायर जले नजर आ रहे हैं।

लोकसभा में बिल को 311 वोटों का समर्थन
लोकसभा में सोमवार को 311 वोटों के साथ नागरिकता संशोधन विधेयक को मजूरी मिली। इस बिल के पास होने के बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंग्लादेश से आने वाले गैर मुस्लिम शरणार्थियों के लिए भारत में नागरिकता का रास्ता तैयार होने लगा है। विधेयक पेश किए जाने से लेकर इसे पारित किए जाने तक विपक्ष के घोर विरोध के बीच भाजपा व सहयोगी दलों के साथ साथ कुछ गैर राजग दलों ने भी इसे बड़े बहुमत से पारित करा लिया।

क्‍या राज्‍यसभा में पास हो पाएगा बिल?
भाजपा को राज्यसभा में भी नागरिक संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए जितनी सीटों की दरकार है, वो एनडीए के दलों के अलावा शिवसेना, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल के समर्थन के साथ आसानी से पूरी हो सकती है। राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल को पास कराने के लिए भाजपा को 239 सीटों के सापेक्ष 120 सीटों के आंकड़े को अपने पक्ष में करने की जरूरत है।

ये है राज्‍यसभा का गणित!
अगर राज्‍यसभा की बात करें, तो भाजपा के पास अभी 83 सांसद हैं। इसके अलावा जनता दल यूनाइटेड के छह, एआइएडीएमके के 11 और अकाली दल के तीन सांसद एवं 12 नामित सांसदों का समर्थन भी भाजपा के समर्थन में हैं। इन सब के अलावा नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी और वाइएसआर कांग्रेस भी इस बिल का राज्यसभा में समर्थन कर सकती हैं। इस तरह यह माना जा रहा है कि भाजपा राज्यसभा में बिल को आसानी से पास कराने में कामयाब हो सकेगी। हालांकि, राजनीति में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह अनुमान लगा पाना बेहद मुश्किल होता है। कौन-सी पार्टी कब अपना रुख बदल ले, ये कहा नहीं जा सकता है।

विधेयक से नागरिकता को लेकर ये होने जा रहे बड़े बदलाव
नागरिकता के लिए जरूरी 11 साल की अनिवार्यता खत्म कर इसे छह साल कर दी गई है। यानी 2021 में होने वाले पश्चिम बंगाल, असम, केरल चुनाव तक कई राज्यों में ऐसे गैर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बढ़ेगी जो नागरिकता की चाह लिए वर्षो से भारत मे रह रहे थे। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार माना जा रहा है कि देश में फिलहाल लगभग दो करोड़ ऐसे लोग हैं जो विभिन्न राज्यों में बसे हैं। ध्यान रहे कि नागरिकता संशोधन विधेयक में उत्तर पूर्व के राज्यों को छूट दे दी गई है। वहां ये नियम लागू नहीं होंगे और ऐसे में भाजपा के खिलाफ वहीं किसी आंदोलन की आशंका खत्म हो गई है। असम में कुछ हिस्सों को छोड़कर बाकी के स्थानों पर यह लागू होगा। ऐसे में बंग्लादेश से आने वाले शरणार्थियों के लिए असम और पश्चिम बंगाल, ओडिशा सबसे मुफीद होगा। जबकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले शरणार्थियों के लिए पंजाब, राजस्थान, हरियाणा समेत पूरा मध्य भारत है।