चीन सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर मिली पादरी को सजा, जानें क्‍या है पूरा मामला

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बीजिंग : चीन में सोमवार को अनधिकृत प्रोटेस्टेंट चर्च के पादरी वांग यी को नौ साल जेल की सजा सुनाई गई। पादरी पर सरकार के खिलाफ आम लोगों को भड़काने का आरोप है। दक्षिण पश्चिम चीन के चेंगदू शहर की अदालत के फैसले के मुताबिक वांग को अवैध व्यापार संचालन का भी दोषी पाया गया है। पिछले साल भी वांग के रेन कान्वेंट चर्च पर कार्रवाई हुई थी।

दिसंबर, 2018 में मारे गए छापे के दौरान वांग को हिरासत में ले लिया गया था जबकि उनके भूमिगत चर्च के दर्जनों सदस्य फरार हो गए थे। कोर्ट के इस निर्णय पर चीन में एमनेस्टी इंटरनेशनल के शोधकर्ता पैट्रिक पून ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा, आज का फैसला चीन में कथित धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। वांग केवल अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन कर रहे थे और देश में मानवाधिकार मूल्यों के लिए खड़े रहते थे।

चीन का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, लेकिन राष्ट्रपति शी चिनफिंग के सत्ता संभालने के बाद से स्थितियों में काफी परिवर्तन आया है। सरकार ने कम्युनिस्ट पार्टी को चुनौती देने वाले धर्मो पर प्रतिबंधों को कड़ा कर दिया है। आधिकारिक तौर पर चीन की नास्तिक सरकार धार्मिक सहित अपने नियंत्रण से बाहर किसी भी संगठित आंदोलन पर हमेशा नजर बनाए रखने के साथ ही समय-समय पर उन पर कार्रवाई करती रहती है।चीन में पूरा ईसाई समुदाय दो हिस्सों में बंटा है।

एक वे लोग हैं जो रेन कान्वेंट जैसे अनधिकृत चर्चो से जुड़े हैं और दूसरे वे हैं जो सरकार द्वारा स्वीकृत चर्चो में जाते हैं। खास बात यह है कि सरकार द्वारा स्वीकृत चर्चो में प्रार्थना के साथ ही कम्युनिस्ट पार्टी के गीतों का नियमित गायन भी अनिवार्य है।

ईसाई धर्म में मुख्य रूप से तीन समुदाय हैं। कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट और ऑर्थोडॉक्स। कैथोलिक समुदाय में पोप को सर्वोच्च धर्मगुरु माना जाता है। ऑर्थोडॉक्स रोम के पोप को नहीं मानते, पर अपने-अपने राष्ट्रीय धर्मसंघ के पैट्रिआर्क को मानते हैं और परंपरावादी होते हैं। प्रोटेस्टेंट पोप को नहीं मानते। इसके बजाय वे पवित्र धर्मग्रंथ बाइबिल में पूरी श्रद्धा रखते हैं।