किसी भी हाल में 31 अक्टूबर को ब्रेक्जिट, ब्रिटेन PM की चेतावनी

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लंदन । ब्रेक्जि‍ट का समर्थन करने वाले अपनी पार्टी के बागी विधायकों को चेताते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि वे आम चुनाव नहीं चाहते हैं। उनकी पार्टी के कुछ सांसद विपक्ष को अपना समर्थन दे रहे हैं जो ब्रेक्जि‍ट के लिए निश्‍चित तारीख 31 अक्‍टूबर को और आगे बढ़ाना चाहते हैं। यदि ऐसा होता है तो तारीख बदलकर अगले साल के जनवरी महीने की हो जाएगी।

ब्रेक्जिट की प्रस्तावित तारीख 31 अक्टूबर पास आ रही है लेकिन इससे पहले ब्रिटेन के निवासी खाने और दवाइयां जमा कर रहे हैं। सुपरमार्केटों का कहना है कि सप्लाई की कमी के चलते कुछ उत्पादों की कमी हो सकती है।

इस बात के अनुमान लगाए जा रहे हैं कि यदि बागी सांसदों को ब्रेग्जिट डील को आगे बढ़ाने की बिल को पास कराने में सफलता मिल जाती है तो ब्रिटिश प्रधानमंत्री समय से पहले आम चुनाव करा सकते हैं। बताया जा रहा है कि बोरिस जानसन चार सितंबर को ही इस बारे में घोषणा कर सकते हैं।

बोरिस जॉनसन ने कहा कि किसी भी हाल में किसी भी स्‍थिति में वे ब्रेक्जि‍ट मे देरी नहीं चाहते हैं।’ उन्‍होंने चेताते हुए कहा, ‘मैं चाहता हूं कि सब यह जान लें – किसी भी हाल में मैं ब्रेक्जि‍ट में देर नहीं होने दूंगा। हम 31 अक्‍टूबर को निकल रहे हैं, इसमें किंतु परंतु नहीं। हम अपने वादों या उस जनमत संग्रह को वापस लेने से संबंधित कियी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगे।’

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि ब्रिटेन में ब्रेग्जिट मसले पर संसद में सरकार समर्थन नहीं जुटा पाई तो प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन मध्यावधि चुनाव कराने पर विचार कर सकते हैं सोमवार को मंत्रियों की बैठक में उन्होंने इस बात का संकेत दिया है। जॉनसन ने दावा किया कि यूरोपीय संघ के साथ नए समझौते की संभावना है क्‍योंकि ब्रिटेन यूरोपीय संघ से निकलने कह तैयारी कर रहा है।

लेबर सांसद हिलेरी बेन ने विधेयक के बारे में जानकारी दी है जिसके जरिए 31 अक्‍टूबर को ब्रेक्जि‍ट पर रोक लगाने का प्रयास है। बेन ने ट्वीटर पर बताया,’विधेयक को उन सांसदों का सहयोग है जिनका मानना है कि अर्थव्‍यवस्‍था के लिए नो डील का परिणाम अच्‍छा नहीं होगा और देश को काफी नुकसान होगा। यह देश के हित में नहीं है।’ विपक्षी व बागी कंजर्वेटिव सांसद इस हफ्ते इस विधेयक पर अपना समर्थन दे सकते हैं। यह कानून बोरिस जॉनसन को ब्रेक्जि‍ट की प्रक्रिया में देरी को मजबूर करेगा और तारीख 31 अक्‍टूबर से बढ़कर जनवरी 2020 हो जाएगी।