सावरकर विवादित साहित्य: BJP ने साधा कांग्रेस पर निशाना, कही ये बड़ी बात

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भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस सेवादल की तरफ से बांटी गई किताब ‘वीर सावरकर कितने वीर’ पर विवाद बढ़ता जा रहा है. किताब में सावरकर पर कांग्रेस सेवा दल की तरफ से की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर बीजेपी ने निशाना साधा है. किताब पर बीजेपी प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने कहा कि जब से बीजेपी सरकार ने 370 की बेड़ियों से कश्मीर को मुक्त किया, राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ और नागरिक संशोधन अधिनियम लागू किया, तब से कांग्रेसी संशय में है कि आखिर वह क्या करें. इसी के चलते कांग्रेस देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारियों को बदनाम करने में लगी हुई है. उन्होंने इस किताब पर कांग्रेस से माफी मांगने की बात कही है.

वहीं, बीजेपी प्रवक्ता रजीश अग्रवाल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सावरकर का सम्मान और उनके नाम पर डाक टिकट जारी करने का काम खुद प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने किया था. उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या कांग्रेसी इंदिरा गांधी के साथ खड़े हैं या नहीं या केवल सोनिया गांधी की चापलूसी में ही लगे हैं.

वीर सावरकर के पोते ने उद्धव ठाकरे से की कार्रवाई की मांग
वहीं, वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने जी मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर कांग्रेस के बड़े नेताओं के खिलाफ शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी है. साथ ही उन्होंने कहा कि सावरकर के बारे में गलत तथ्य पेश किए गए हैं. उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे से भी कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई करने की मांग की.

किताब पर RSS ने भी जताई नाराजगी
संघ विचारक अनिल सौमित्र ने किताब पर निशाना साधते हुए कहा कि सावरकर को एक ही जीवन में दो बार आजीवन कारावास की सजा मिली, वो भी अंग्रेजों के जमाने में तो अंग्रेजों की खुशामद करने के लिए तो मिली नहीं, जबकि कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी रहे जिनको जेल तो हुई लेकिन सभी तरह की सुख सुविधाओं के साथ.

कांग्रेस सेवादल ने दी सफाई
कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी भाई देसाई ने किताब पर सफाई देते हुए कहा कि इतिहास में चोरी, देश की आत्मा के साथ चोरी, देश के संविधान के साथ चोरी, आज़ादी के आंदोलन में गद्दारी, ये सब कुछ कार्यकर्ताओं को समझना जरूरी है, ताकि कार्यकर्ता खुलकर जनता के बीच में जा सके और सत्य-असत्य के बीच और हिंसा-अहिंसा के बीच फर्क को बता सके. उन्होंने किताब में छपे तमाम तथ्यों को भी सही बताया.

किताब में क्या है?
ये किताब भोपाल में आयोजित किए गए कांग्रेस सेवा दल के 10 दिवसीय ट्रेनिंग कैंप में कार्यकर्ताओं को बांटी गई. इसमें महात्मा गांधी की हत्या, नाथूराम गोडसे और वीडी सावरकर का जिक्र किया गया है. किताब में दावा किया गया है कि नाथूराम गोडसे और वीर सावरकर के बीच समलैंगिक संबंध थे. किताब में लिखा है, सावरकर जब 12 साल के थे तब उन्होंने मस्जिद पर पत्थर फेंके थे और वहां की टाइल्स तोड़ दी थी. किताब के 14वें पन्ने पर सवाल है, क्या सावरकर ने हिंदुओं को अल्पसंख्यक महिलाओं से बलात्कार करने के लिए प्रोत्साहित किया?

इसके जवाब में लिखा है, यह सही है. सावरकर ने बलात्कार को एक न्यायसंगत राजनैतिक हथियार बताया था. अपनी पुस्तक ‘सिक्स ग्लोरियस एपोक्स ऑफ इंडियन हिस्ट्री’ में जानवरों की व्यावहारिक प्रवृत्ति को जोड़ते हुए सावरकर ने व्याख्या की कि कैसे हर जानवर अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अपनी आबादी बढ़ाना चाहता है. यहां तक कि रावण और सीता के बारे में वे कहते हैं कि शत्रु की महिला को अगवा करने और उससे बलात्कार करने को तुम अधर्म कहते हो? ये तो परोधर्म है. महानतम कर्तव्य. उनके अनुसार हिंदुओं के विरुद्ध मुस्लिम महिलाएं इसलिए भाग लेती हैं क्योंकि उन्हें हिन्दू पुरुषों से इसके लिए बदला लिए जाने का डर नहीं होता है. जो कि इस विकृत सोच से ग्रस्त हैं कि महिलाओं को शिष्टाचार और सम्मान देना चाहिए.