नागरिकता संशोधन बिल को मिली मंजूरी

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विपक्षी दल इस बिल से सहमत नहीं

नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन विधेयक बिल को कैबिनेट मीटिंग में मंजूरी मिल गई है। अब तो इसे सदन में गुरुवार को या फिर सप्ताह गृह मंत्री अमित शाह की ओर से पेश किया जा सकता है। नागरिकता संशोधन विधेयक चर्चा में है। मोदी सरकार ने बुधवार को कैबिनेट बैठक में इस विधेयक को पास किया। अब यह विधेयक पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में जाएगा। इस पर संसद में तीन तलाक और अनुच्छेद 370 जैसा घमासान देखने को मिल सकता है। विपक्षी दल इसके साफ संकेत दे चुके हैं कि संसद से सरकार के लिए बिल पास करवाना आसान नहीं होगा।
देश में अवैध घुसपैठियों का मामला काफी समय से चर्चा का विषय है। घुसपैठियों को देश से बाहर करने की दिशा में सबसे पहले असम में एनआरसी यानी नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस पर काम हुआ, लेकिन एनआरसी को लेकर यह विवाद हुआ कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को भी नागरिकता की लिस्ट से बाहर रखा गया है जो देश के असल निवासी हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश करेगी। इस विधेयक को लेकर भी विवाद हैं। नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है। मौजूदा समय में किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य है। इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल करना है यानी इन तीनों देशों के छह धर्मों के बीते एक से छह सालों में भारत बसे लोगों को नागरिकता मिल सकेगी।